November 29, 2022

President of India Notes in Hindi – योग्यताएं,चुनाव प्रकिया और कार्यकाल

President of India Notes in Hindi

मस्कार दोस्तों आपका हमारी website में स्वागत है| दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमनें आपको President of India Notes in Hindi के बारें  में  विस्तारपुर्वक जानकारी साझा की है| इसमें हम आपको भारत के राष्ट्रपति-राष्ट्रपति की शक्तियां-राष्ट्रपति की योग्यता-राष्ट्रपति की नियुक्ति की प्रक्रिया-राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया-राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रक्रिया आदि के बारे में  जानकारी साझा की है| 

भारत के राष्ट्रपति 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति पद का प्रावधान किया गया है| राष्ट्रपति का पद सर्वाधिक सम्मान गरिमा तथा प्रतिष्ठा का है| राष्ट्रपति राष्ट्र का अध्यक्ष होता है| केंद्र की समस्त कार्यपालिका शक्तियां निहित होती है| जिनका प्रयोग वह स्वयं या अधिनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है|

भारत सरकार के समस्त कार्यपालिका संबंधी कार्य उसी के नाम से संचालित किए जाते हैं| राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है|

डॉ राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति होने के साथ इस पद पर सर्वाधिक 12 वर्ष तक रहे|

डॉ जाकिर हुसैन देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे|

ये पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जिनकी कार्यलय के दौरान मृत्यु हो गयी थी|

एम. हिदायतुल्ला राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले सर्वोच्च न्यायलय के एकमात्र न्यायधीश रहे है|

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (14 वें) है|

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राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए निर्वाचक मंडल के 50 सद्स्य प्रस्तावक के रूप में तथा 50 सद्स्य अनुमोदक के रूप में आवश्यक माने जाते है|

President of India Notes in Hindi - योग्यताएं,चुनाव प्रकिया और कार्यकाल
President of India Notes in Hindi – योग्यताएं,चुनाव प्रकिया और कार्यकाल

भारत के राष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया 

भारत के राष्राट्ष्ट्ररपति चुनाव की प्रक्रिया भारतीय संविधान के आर्टिकल 55 में मेंशन किया गया है | राष्ट्रपति देश और सरकार दोनों का प्रमुख होता है, और देश का प्रथम नागरिक होता है| राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है| जिसके सद्स्य संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सद्स्य होते है| निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणिय मत-पद्धति द्वारा होता है|

 मतदान गुप्त मतपत्र द्वारा होता है और चुनाव में सफलता प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार कोन्यूनतम कोटाप्राप्त होना आवश्यक होता है| न्यूनतम कोटा निर्धारित करने लिए निम्न सूत्र अपनाया जाता है:-

 न्यूनतम कोटा = दिए गये मतों की संख्या /राष्ट्रपति पद हेतु प्रत्याशियों की संख्या + 1 राज्य की विधानसभा के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य का मत मूल्य

= राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य की विधानसभा के कुल निर्वाचित सद्स्य की संख्या*1/100 संसद के प्रयेक निर्वाचित सद्स्य का मत मूल्य

= सभी राज्यों की विधानसभाओं के कुल निर्वाचित सदस्यों के कुल मतों का योग/संसद के कुल निर्वाचित सद्स्य की संख्या

योग्यताएं

भारतीय संविधान अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति पद उम्मीदवार के लिए निम्न योग्यताएं अनिवार्य है|

1- वह भारत का नागरिक हो|

2- उसकी आयु 35 वर्ष से कम न हो|

3- लोकसभा का सद्स्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो|

4- भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर आसीन न हो परन्तु, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रप्ति, राज्यपाल,संघ व् राज्य के मंत्री लाभ के पद की अधीन नहीं होते है| अत: उन्हें राष्ट्रपति पद के अर्हक उम्मीदवार बनाया जा सकता है|

कार्यकाल,वेतन एवं शपथ

राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है किंतु अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक वह अपने पद पर बना रहता है| यदि मृत्यु त्याग, पत्र अथवा महाभियोग द्वारा पदच्युति के कारण राष्ट्रपति का पद इस अवधि  के अंतर्गत रिक्त हो जाए तो इस स्थिति में नए राष्ट्रपति का चुनाव होना 5 वर्ष की संपूर्ण विधि के लिए होता है ना की शेष अवधि शेष अवधि के लिए|

राष्ट्रपति की मासिक उपलब्धियां 1,50,000 (आयकर कर मुक्त) है| इसके अतिरिक्त उन्हें नि:शुल्क निवास व् संसद द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते प्राप्त होते हैसेवानिवृति के बाद राष्ट्रपति को 9 लाख रूपये वार्षिक पेंशन प्राप्त होती है|

संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की उपलब्धियां और भत्ते उसके कार्यकाल में घटाएं नहीं जा सकतेराष्ट्रपति को उसके पद और गोपनीयता  तथा विधि की परीरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है|राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित कर देता है|

 

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राष्ट्रपति की शक्तियां

संविधान के तहत भारत के राष्ट्रपति को विविध प्रकार की शक्तियां प्राप्त हैं जैसे:-

कार्यपालिका की शक्तियां

केंद्र सरकार की समस्त शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में निहित होती है| उसी के नाम से देश की नीतियों का संचालन होता है| उसे विशिष्ट पदों पर नियुक्तियां करने का अधिकार है| प्रधानमंत्री एवं अन्य मंत्रीगण,सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, निर्वाचन आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष वह अन्य सदस्य की नियुक्ति करता है|वह विदेशी राजनयिकों का आमंत्रण पत्र स्वीकार करता है तथा राजदूतों को नियुक्ति पत्र जारी करता है|

 विधियी शक्तियाँ 

राष्ट्रपति अपनी विधाई शक्तियों का प्रयोग मंत्री परिषद अनुच्छेद 74 के परामर्श पर कर सकता है| राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग होता है उसके हस्ताक्षर से कोई कानून बन सकता हैवह संसद का सत्र आहूत करने सत्रावसन करने तथा लोकसभा को भंग भी कर सकता है|

 वह लोकसभा के प्रथम सत्र को संबोधित कर सकता है| संयुक्त अधिवेशन बुलाकर अभिभाषण ले सकता है| नए राज्य के निर्माण, राज्य की सीमा में परिवर्तन संबंधित, विधेयक धन विधेयक या संचित निधि पर भारित व्यय वाला विधेयक, राज्य हित से जुड़े विधेयक बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के संसद में प्रस्तुत नहीं होते हैं|

 वह लोकसभा के लिए आंगल भारतीय समुदाय से 2 तथा राज्यसभा के लिए कला, साहित्य, विज्ञान, समाज ,सेवा क्षेत्र के 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता हैसविंधान के अनुछेद 123 के अंतर्गत असामान्य स्थिति में अध्यादेश जारी कर सकता है|

 न्यायिक शक्तियाँ 

सविंधान के अनुछेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराधी की सजा को क्षमा करने उसका प्रविलंबन करने,परिहार और कम करने का अधिकार प्राप्त है| वह मृत्युदंड को माफ़ भी कर सकता है|

 वह सैन्य प्रशासन द्वारा प्राप्त सजा या कोर्ट मार्शल की सजा को भी माफ कर सकता है| उसे अधिकार है कि किसी सार्वजनिक हित के प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श ले सके| अनुच्छेद 143  

 सैन्य शक्तियां 

भारत का राष्ट्रपति रक्षा बलों का सर्वोच्च कमांडर होता है| उसे युद्ध और शांति की घोषणा करने तथा सैन्य बलों के प्र्विस्तारण हेतु आदेश देने की शक्ति होती है|

 विशेषाधिकार शक्तियाँ 

भृत्य सविंधान के अनुसार राष्ट्रपति, मंत्रीपरिषद की सलाह पर कार्य करता है| किन्तु विशेष परिस्थियों में वः अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करके कार्य करता है| ये स्थितियां है-

जब किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नही हो|

पदधारी की अचानक मृत्यु की दशा में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करनी हो|

यदि सतारूढ़ मंत्रीपरिषद के विरुद्ध अविश्वाश प्रस्ताव पारित हो गया हो|

 आपातकालीन शक्तियाँ 

– भारतीय सविंधान में राष्ट्रपति को तीन स्थितयों में विशिस्ट आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गयी है|

– सविंधान के अनुछेद 352 के अंतर्गत युद्ध, बाह्य आक्रमण या श्स्शस्त्र विद्रोह की स्थिति से राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाए की पुरे भारत या किसी एक भाग की सुरक्षा खतरे में है| तो वह सम्पूर्ण भारत या किसी भाग में आपातकाल की घोषणा कर सकता है| एवं एक माह की अवधि के पश्चात एसी घोषणा संसद से अनुमोदन न होने की स्थिति में स्वत: समाप्त हो जायेगी| ईएसआई घोषणा को संसद दो तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक है|

 

राष्ट्रपति की वीटों शक्तियाँ

भारत की राष्ट्रपति को तीन प्रकार की वीटो शक्ति प्राप्त है:-

आत्न्यन्तिक वीटो (Absolute Veto): इस वीटो की शक्ति के बाद राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी अनुमति नहीं देते देता है,अर्थात वह अपनी अनुमति को सुरक्षित रख सकता है|

निलम्बनकारी वीटो (Suspension veto:-  इस वीटो शक्ति के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक को संसद के बाद पुनर्विचार हेतु दे सकता है|

 जेबी वीटो (pocket veto):-  इस वीटो शक्ति के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए अपने पास सुरक्षित रख सकता है| भारत और इस विश्व शक्ति के प्रयोग द्वारा राष्ट्रपति किसी विधेयक पर ना तो अनुमति देता है और ना ही अनुमति देने से इनकार करता है और ना ही पुनर्विचार हेतु संसद के पास भेजता है| भारतीय डाक संशोधन विधेयक 1986 के संबंध में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा जेबी वीटो का प्रयोग किया गया| भारत में किसी राष्ट्रपति द्वारा जेबी विटो का प्रथम प्रयोग था

 

– संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यदि कोई राज्य सरकार संवैधानिक पदों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है तो राष्ट्रपति वहां आपातकाल की घोषणा कर सकता है| राष्ट्रपति शासन में ऐसी घोषणा का संसद द्वारा अनुमोदन 2 माह के अंदर होना आवश्यक है|

– संविधान के अनुच्छेद 307 के अंतर्गत देश में आर्थिक संकट की स्थिति में राष्ट्रपति अपनी विशिष्ट शक्तियों का प्रयोग कर वित्तीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है| भारत में वित्तीय आपात की आवश्यकता अभी तक नहीं पड़ी है|

पद रिक्ति 

यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्याग पत्र अथवा पद से हटाए जाने के कारण रिक्त होता है, तो उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है| यदि उपराष्ट्रपति भी अनुपस्थित है, तो सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है| मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है| राष्ट्रपति के पद के लिए नया चुनाव पद रिक्त होने के 6 महीने के भीतर भी होना जरूरी है| भारतीय संविधान द्वारा राष्ट्रपति पद पर पुनर्निर्माण करने के लिए किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है|

महाभियोग 

राष्ट्रपति को उसकी पदावधि की समाप्ति के पूर्व संविधान के उल्लंघन के आरोप में महाभियोग लगाकर पद मुक्त किया जा सकता है| संसद के किसी भी सदन में महाभियोग की प्रक्रिया 14 दिन की पूर्व सूचना के साथ शुरू की जा सकती है| बशर्ते उच्च सदन के एक स्थाई सदस्य लिखित प्रस्ताव द्वारा व्यक्त करें|

आरोपों का अन्वेषण अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए| इस दौरान उपराष्ट्रपति को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार है| यदि संसद के दोनों सदन दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति को पद मुक्त किया जा सकता है|

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