February 2, 2023

Light chapter for Competitive Exams in hindi – भौतिक विज्ञान

प्रकाश का अपवर्तनः जब प्रकाश की किरणें एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो दोनों माध्यमों को अलग करने वाले तल पर अभिलम्बवत् आपातीहोने पर बिना मुड़े सीधे निकल जाती है, परन्तु तिरछी आपाती होने पर वे अपनी मूल दिशा से विचलित हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। उदाहरणस्वरूप-रात्रि के समय तारों का टिमटिमाना, पानी से भरे किसी बर्तन की तली में पड़ा हुआ सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई पड़ना एवं द्रव में अंशतः डूबी हुई सीधी छड़ का टेढ़ा दिखाई पड़ना।

• प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तनः जब कोई प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो अपवर्तन के कारण अपवर्तित किरण अभिलंब से दूर हटती जाती है। जैसे-जैसे हम आपतन कोण का मान बढ़ाते जाते हैं, विरल माध्यम में अपवर्तित किरण अभिलंब से दूर हटती जाती है, अर्थात् अपवर्तन कोण का मान बढ़ता जाता है। जब एक निश्चित आपतन कोण के लिए अपवर्तन कोण

का मान 90° हो जाता है, तो इस आपतन कोण को क्रांतिक कोण कहते हैं। यदि आपतन कोण को और बढ़ायें, तो किरणों का अपवर्तन नहीं हो सकेगा, क्योंकि अपवर्तन कोण का मान 90° से अधिक नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में आपतित किरणें परावर्तन के नियमानुसार सघन माध्यम में परावर्तित हो जाती है। यह घटना पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहलाती है।

पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उदाहरण

(i) हीरा अत्यधिक चमकता है।

(ii) रेगिस्तान में मरीचिका तथा ठण्डे देशों में मरीचिका दिखाई देती है।

(ii) काँच का चटका हुआ भाग चमकीला दिखाई देता है।

(iv) प्रकाशिक तन्तु (Optical Fibres) पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत पर काम करते हैं।

• लाल, हरे और नीले रंग को प्राथमिक रंग या मूल रंग कहते हैं।

• मैजेंटा, मोरनी रंग व पीला द्वितीयक रंग कहलाते हैं।

• रंगीन टेलीविजन में प्राथमिक रंग लाल, हरा एवं नीला का उपयोग किया जाता है।

निकट दृष्टि दोष (Myopia): इस रोग से ग्रसित व्यक्ति नजदीक की वस्तु को देख लेता है, परन्तु दूर स्थित वस्तु को नहीं देख पाता है। इसमें वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर न बनकर रेटिना के आगे बन जाता है। निकट दृष्टि दोष के निवारण के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है|

दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia): इस रोग से ग्रसित व्यक्ति को दूर की वस्तु दिखलाई पड़ती है, निकट की वस्तु दिखलाई नहीं पड़ती है। इस रोग में निकट की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे बनता है। दूर दृष्टि दोष के निवारण के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।

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