February 2, 2023

History of Mandi Ddistrict in Hindi I मंडी,हिमाचल प्रदेश

भवानी सेन (1903 ई.) – भवानी सेन ने 1906 ई. में दरबार हॉल बनवाया| राजा भवानी सेन ने 1911 ई. में दिल्ली दरबार में भाग लिया| मंडी से पंजाब सरकार का नियंत्रण 1 नवंबर, 1921 ई. को हटाकर ब्रिटिश-भारत सरकार के अधीन ला दिया गया|

जोगेंद्र सेन (1948 ई.) – जोगेंद्र सेन (1925-1948 ई.) मंडी रियासत के अंतिम शासक थे|

सुकेत रियासत – कनिंघम के अनुसार सेन वंश बंगाल से आया था|

वीरसेन – वीरसेन ने सर्वप्रथम कुन्नु धार को अपना आवास बनाया था| वीरसेन ने सुकेत रियासत की पहली राजधानी सुरही इलाके के पांगणा में स्थापित की| वीरसेन ने चम्बा जे मुसानवर्मन को अपने राज्य की राजधानी पांगणा में आश्रय देकर अपनी पुत्री का बिबाह उससे करवाया| वीरसेन ने पांगणा जागीर को दहेज में मुसानवर्मन को दिया| वीरसेन नें कुल्लू के राजा भूपपाल को कैद कर कुल्लू रियासत को पानी जागीर बनाया| वीर सेन ने कांगड़ा के साथ सोम रेखा निर्धारित कर सीरखड्ड पर वीरा दुर्ग का निर्माण करवाया| हाटली के राणा को हराने के उपलक्ष्य ने वीरसेन ने बीरकोट दुर्ग का निर्माण करवाया|

2. विक्रमसेन-विक्रमसेन धार्मिक स्वभाव का राजा था। वह 2 वर्षों के लिए अपना राजपाट अपने भाई त्रिविक्रमसेन को सौंपकर हरिद्वार तीर्थ यात्रा पर चला गया। त्रिविक्रमसेन ने कुल्लू के राजा हस्तपाल के साथ मिलकर विक्रमसेन के विरुद्ध षड्यन्त्र रचा। विकमसेन ने क्योंथल के राजा की सहायता से ज्यूरी में त्रिविक्रम सेन और हस्तपाल को युद्ध में हराया।

3. लक्ष्मणसेन-लक्ष्मणसेन ने कुल्लू पर आक्रमण कर वजीरी रूपी, वजीरी लगसारी और वजीरी परोल के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया।

4. साहूसेन (1000 ई.)-साहूसेन के भाई बाहूसेन ने मंगलोर (कुल्लू) में मण्डी रियासत की स्थापना की।

5. मदन सेन (1240 ई.)-मदनसेन ने पंगाणा के उत्तर में मदनकोट दुर्ग का निर्माण करवाया। मदनसेन ने गुम्मा और द्रंग के राणाओं को हराकर नमक की खानों पर कब्जा कर लिया। मदनसेन ने कुल्लू पर पुनः कब्जा कर मनाली से बजौरा तक का इलाका राणा भोसल को दे दिया। मदनसेन ने बटवाड़ा के राणा मांगल को हराया जिससे राणा मांगल को सतलुज पार भाग कर मांगल रियासत की स्थापना करनी पड़ी। मदनसेन के शासन में सुकेत रियासत अपनी समृद्धि के चरम पर पहुँच गया था। मदनसेन ने 1240 ई. में पंगाणा से राजधानी बदलकर लोहारा (बल्हघाटी) में स्थापित की।

6. करतार सेन (1520 ई.)-करतार सेन ने 1520 ई. में अपनी राजधानी लोहरा से करतारपुर स्थानांतरित की। करतारपुर को वर्तमान में पुरानानगर कहा जाता है। करतारसेन के बाद अर्जुन सेन राजा जो कुल्लू के राजा जगत सिंह का समकालीन था।

7. श्यामसेन (1620 ई.)-श्यामसेन को नूरपुर के राजा जगत सिंह की शिकायत पर मुगल सम्राट औरंगजेब ने दिल्ली बुलाकर कैद कर दिया। श्यामतेन ने माहूनाग से उसकी मुक्ति की प्रार्थना की, जिसके बाद जगत सिंह के विद्रोह के कारण श्यामसेन की रैल से शीघ्र मुक्ति हो गई। श्याम सेन ने 400 रुपये वार्षिक कर पर माहूनाग मंदिर को जागीर दान में दे दी। श्यामसेन के बाद रामसेन ने माधोपुर में रामगढ़ दुर्ग बनवाया।

8. गरूणसेन (1721-1748 ई.)-गरुण सेन ने सुन्दरनगर (बनेड प्राचीन नाम) शहर की स्थापना की जिसे विक्रमसेन ने राजधानी बनाया। गरुण सेन की रानी ने सूरजकुण्ड मंदिर का निर्माण करवाया।

9. विक्रमसेन (1748-1767 ई.)-विक्रमसेन के समय 1752 ई. में अहमद शाह दुर्रानी ने सुकेत रियासत पर कब्जा किया। 1133 ई. में अदीना बेग ने सुकेत रियासत पर कब्जा किया। सुकेत रियासत पर विक्रमसेन के समय में सर्वप्रथम सिख शासन 1758 ई. में जस्सा सिंह रामगढ़िया ने स्थापित किया।

10. रणजीत सेन (1767-1791 ई.)-रणजीत सेन के समय जह सिंह कन्हैया (1775-1786 ई. तक) ने सुकेत रियासत को अपने अधीन रखा।

11. विक्रमसेन द्वितीय (1791-1838 ई.)-विक्रम सेन के वजीर नरपत के साथ संबंध अच्छे नहीं थे। इसलिए विक्रमसेन 1786 ई. से 1792 ई. तक महलमोरियों में रहे। अपनी पिता की मृत्यु के बाद विक्रमसेन ने सर्वप्रथम नरपत वजीर को ‘बंटवारा’ किले में कैद कर मरवा दिया। विक्रमसेन ने बनेड (सुंदर नगर) को अपनी नई राजधानी बनाया। सुकेत रियासत 1809 ई. में विक्रमसेन के समय में महाराजा रणजीत सिंह के अधीन आ गई। विलियम मूरक्रॉफ्ट ने 1820 ई. में सुकेत रियासत की यात्रा की।

12. उग्रसेन (1838-76 ई.)-उग्रसेन के समय 1839 ई. में विग्ने ने सुकेत की यात्रा की। रणजीत सिंह के पोते नौनिहाल सिंह ने 1840 ई. में जनरल वन्चूरा के नेतृत्व में सुकेत रियासत पर कब्जा कर लिया। उग्रसेन ने 1846 ई. में सिखों को राज्य से निकालकर ब्रिटिश सत्ता की अधीनता स्वीकार कर ली। 1846 ई. में सुकेत रियासत अंग्रेजों के अधीन आ गई। उग्रसेन के वजीर नरोत्तम ने दुर्गा मंदिर का निर्माण करवाया। वह नरसिंह मंदिर का भी वजीर था। उग्रसेन ने अमला विमला में शिवमंदिर का निर्माण किया। 1876 ई. में उग्रसेन की मृत्यु हुई।

सुंदरनगर शहर का पुराना नाम क्या था?
सुंदरनगर शहर का पुराना नाम बनेड था| यह मंडी जिला के सुकेत रियासत का क्षेत्र था| वर्तमान में इसे सुंदरनगर के नाम से जाता है| इसकी समुद्रतल से ऊँचाई 866 मीटर (2,841 फिट) है| 

13. दुष्ट निकंदन सेन (1879-1908 ई.)-दुष्टनिकंदन सेन के समय 1893 ई. में भोजपुर में स्कूल, बनेड़ में पोस्ट ऑफिस 1900 ई. में और टेलीग्रॉफ 1906 ई. में खोला गया। सतलुज नदी के ऊपर 1889 ई. में ज्युरी में पुल का निर्माण किया गया।

14. भीमसेन (1908-1919 ई.)-भीमसेन ने बनेड़ में किंग एडवर्ड अस्पताल खोला। उन्होंने मण्डी-सुकेत मोटर सड़क का निर्माण करवाया।

15. लक्ष्मणसेन (1919-1948 ई.)-लक्ष्मण सेन सुकेत रियासत का अंतिम राजा था। प्रथम नवम्बर, 1921 ई. को सुकेत रियासत पंजाब सरकार से ब्रिटिश भारत सरकार के अधीन आ गई। फरवरी, 1948 ई. में पण्डित पद्मदेव के नेतृत्व में सुकेत सत्याग्रह हुआ जिसके बाद सुकेत रियासत का विलय भारत में हो गया। मण्डी और सुकेत रियासत को मिलाकर 15 अप्रैल, 1948 ई. को मण्डी जिले का निर्माण किया गया।

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