December 2, 2022

[*लाहौल स्पीति हिस्ट्री*]History of Lahaul Spiti in Hindi-लाहौल-स्पीति का इतिहास

History of Lahaul Spiti in Hindi

जिले के रूप में गठन – 1 नवंबर, 1966 जिला मुख्यालय – केलांग

जनसंख्या घनत्व – 2 (2011 में) साक्षरता – 77.24% (2011 में)

कुल क्षेत्रफल – 13,835 वर्ग किमी (24.85% हिमाचल प्रदेश का)

जनसंख्या – 31,528% (2011 में) लिंग अनुपात – 916(2011 में)

ग्राम पंचायते – 204 शिशु लिंगानुपात – 1013(2011 में) (भारत में सर्वाधिक)

(i) भूगोल

1. भौगोलिक स्थितिलाहौल-स्पीति हिमाचल प्रदेश के उत्तर भाग में स्थित जिला है। यह 31°44°57″ से 32°59’57” उत्तरी अक्षांश और 76°46’29” से 78°41’34” पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। लाहौल-स्पीति के उत्तर में जम्मू-कश्मीर, पूर्व में तिब्बत, दक्षिण-पूर्व में किन्नौर, दक्षिण में कुल्लू, पश्चिम में चम्बा और दक्षिण-पश्चिम में काँगड़ा जिला स्थित है।

2. दरे-रोहतांग दर्रा-रोहतांग दर्रा लाहौल को कुल्लू से जोड़ता है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर स्थित है। रोहतांग का अर्थ है-लाशों का हेर।

भंगाल दर्रा-लाहौल और बड़ा भंगाल के बीच स्थित है।

शिंगडा कोन दर्रा-लाहौल और जास्कर के बीच स्थित है।

कुंजुम दर्रालाहौल को स्पीति से जोड़ता है।

कुगती दर्रालाहौल को भरमौर से जोड़ता है।

बारालाचा दर्रालाहौल को लद्दाख से जोड़ता है। इस पर जास्कर, स्पीति, लाहौल और लद्दाख की सड़कें आपस में मिलक हैं। इस दरें से चंद्रभागा और यूनान नदियां निकलती हैं।

3. घाटियाँलाहौल में तीन घाटियाँ हैं-चन्द्रा घाटी, भागा घाटी और चन्द्रभागा घाटी । चन्द्राघाटी को रंगोली भी कहा जाता है। कोकसर इस घाटी का पहला गाँव है। भागा घाटी को गारा कहा जाता है। यह बारालाचा दर्रे से लेकर दारचा तक फैली है। चन्द्रभागा घाटी को पट्टन घाटी भी कहते हैं। स्पीति में पिन घाटी स्थित है। जो पिन नदी के साथ स्थित है। यह ढाँकर के पास स्पीति घाटी से मिलती है। स्पीति घाटी स्पीति नदी से बनती है जो कुंजुमला से लेकर शुमडो (पारछू नदी शुमडो में स्पीति नदी में मिलती है। तक फैली है। स्पीति घाटी का गेटे गाँव (4270 मी.) विश्व का सबसे ऊँचा आबाद गाँव है।

4. नदियाँचन्द्रा, भागा, स्पीति और पिन लाहौल-स्पीति की प्रमुख नदियाँ हैं। चन्द्रा और भागा नदी बारालाचा दर्रे (4890 मी.) से निकलती हैं।

(i) चन्द्रा नदी-शिगड़ी ग्लेशियर से होते हुए टाण्डी तक बहती है। चन्द्रा नदी को बड़ा शिगड़ी और समुद्री ग्लेशियर से पानी मिलता है। खोकसर, सिस्सु, गोंदला चन्द्रा नदी के किनारे स्थित है।

 भागा नदी-बारालाचा दर्रे से निकलकर सूरजताल (सूर्य की झील) में प्रवेश करती है। दारचा में भागा नदी जास्कर नदी में मिलती है। दारचा और टाण्डी के बीच केलांग, खारडोंग और गेमूर गाँव भागा नदी के किनारे स्थित हैं।

(ii) स्पीति नदी-स्पीति की और किन्नौर की प्रमुख नदी है। यह खाब के पास सतलुज नदी में मिलती है। मोरंग, रंगरीक, धनकर, ताबो स्पीति नदी के किनारे स्थित प्रमुख गाँव हैं।

(iv) पिन नदी स्पीति नदी की सहायक नदी है।

5. ग्लेशियर-एंड्रयू विल्सन ने 1873 ई. में लाहौल स्पीति को ग्लेशियर की घाटी कहा था। कैप्टन हारकोट ने 1869 ई. में शिगड़ी ग्लेशियर (लाहौल) को पार किया जो 25 कि.मी. लम्बा है। यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। सोनापानी ग्लेशियर कि.मी. लम्बा है।

1.नामकरण- . लाहौल-लाहौल को गारजा और स्वांगला भी कहा जाता है। कनिंघम के अनुसार लाहौल का अर्थ ‘दक्षिण जिला’ लद्दार का। राहुल सांस्कृत्यायन ने लाहौल को “देवताओं की भूमि” कहा है जबकि एक अन्य अर्थ में इसे “दरे का देश” भी कहा जाता है। तिनान, पुनान और टोड भाषाओं (लाहौल की) में लाहौल को गारजा कहा गया है। मान्छद भाषा में लाहौल को स्वांगला कहा गया है। बुद्ध के पुत्र राहुल के नाम से भी लाहुल की उत्पत्ति हो सकती है।

2. स्पीति-स्पीति का शाब्दिक अर्थ है “मणियों की भूमि” । स्पीति का मुख्यालय काजा है। इससे पहले स्पीति का मुख्यालय ढाँकर था।

(iii) इतिहास 

1. प्राचीन इतिहास-मनु को इस क्षेत्र का प्राचीन शासक बताया गया है। महाभारत युद्ध में भी इस क्षेत्र के लोगों ने भाग लिया था। कनिष्क (कुषाण वंश) के समय यह क्षेत्र उनके कब्जे में था। जास्कर क्षेत्र में कनिष्क का एक स्तूप प्राप्त हुआ है। गुप्त काल के बाद हर्षवर्धन (606-664 ई.) के समय लाहौल का संबंध हर्ष के साम्राज्य से पुनः जुड़ गया। ह्वेनसांग ने 635 ई. में कुन्त और लाहौल की यात्रा की थी। 600 ई. के आसपास चम्बा ने लाहौल पर विजय प्राप्त की थी। लाहौल पर हर्ष के समय कुल्लू और राजाओं का राज था जिसका पहला राजा समुद्र सेन था। स्पीति के राजा राजेन्द्र सेन ने कुछ समय तक कुल्लू को अपने अधीन किया। छेतसेन के समय (सातवीं सदी) स्पीति लद्दाख के अधीन आ गया। स्पीति के शासकों को ‘नोनो’ कहा जाता था।

मध्यकालीन इतिहास– 5वीं सदी में लाहौल कश्मीर का भाग बन गया था। उदयपुर के मृकुला देवी और त्रिलोकीनाथ में कश्मीर कला के नमूने मिले हैं। कश्मीर कला 11वीं सदी तक लाहौल में रही।लाहौल पर लद्दाख के राजा ला-चन-उत्पल (1080-1110 ई.) का शासन तब से रहा जबसे उसने कुल्लू पर आक्रमण कर उसे गाय और याक के मिश्रण ‘जो’ देने के लिए मजबूर किया। कश्मीर के राजा जैन-उल-बद्दीन (1420-1470 ई.) के तिब्बत आक्रमण के समय कुल्लू और लाहौल लद्दाख (तिब्बत) के अधीन थे।

• कुल्लू के राजा बहादुर शाह (1532-1559 ई.) के समय लाहौल कुल्लू का भाग बन गया था। वर्ष 1631 ई. में भी लाहौल कुल्लू का भाग-था। चम्बा के राजाओं ने भी लाहौल के अधिकतर भाग पर अधिकार किया था। उदयपुर का मृकुला देवी मंदिर चम्बा के राजा प्रताप सिंह वर्मन द्वारा बनवाया गया था।

• कुल्लू के राजा जगत सिंह (1637-1672 ई.) के समय लाहौल कुल्लू का भाग था। वर्ष 1681 ई. में मंगोलों ने लाहौल पर आक्रमण किया था क्योंकि यहाँ के लामा ‘डुगपा मत’ के मानने वाले थे। मुगलों की मदद से कुल्लू के राजा विधि सिंह (1672-88 ई.) ने लाहौल के ऊपरी क्षेत्रों पर कब्जा किया था। विधि सिंह के समय से थिरोट कुल्लू और चम्बा के बीच की सीमा का निर्धारण करता था। तिब्बत-लद्दाखी मुगल युद्ध (1681-83) में स्पीति काफी हद तक कुल्लू और लद्दाख से स्वतंत्र था।

• कुल्लू के राजा मानसिंह (1690-1720 ई.) ने गोंदला किला बनवाया था।

3. आधुनिक इतिहासगेमूर गोम्पा में कुल्लू के राजा विक्रम सिंह (1806-1816 ई.) का नाम एक शिलालेख में मिला है। विलियम मूरक्राफ्ट की 1820 ई. में लाहौल यात्रा का विवरण भी यहाँ पर दर्ज है। विलियम मूरक्राफ्ट के अनुसार लाहौल तब लद्दाख के अधीन था। लाहौल की राजधानी उस समय टाण्डी थी।

ज़िला लाहौल एवं स्पीति-लाहौल स्पीति का इतिहास

सिख-1840 ई. में लाहौल सिखों के कब्जे में आ गया। कनिंघम ने 1839 ई. में लाहौल की यात्रा की। सिखों के सेनापति जोरावर सिंह ने 1834-35 ई. में लद्दाख/जास्कर और स्पीति पर आक्रमण किया। 1846 ई. में अमृतसर संधि (अंग्रेजों और गुलाब सिंह) के बाद ‘स्पीति’ अंग्रेजों के अधीन आ गया। चम्बा लाहौल और ब्रिटिश लाहौल का विलय 1975 ई. में हुआ। अंग्रेजों ने बलिराम को लाहौल का पहला नेगी बनाया। 1857 ई. के विद्रोह के समय स्पीति के ‘नोनो बजीर’ ने अंग्रेजों की मदद की थी। प्रथम विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों ने लाहौल के वजीर अमीरचंद को ‘रायबहादुर’ (1917 ई.) की उपाधि प्रदान की। 1941 ई. को लाहौल-स्पीति उपतहसील बनी और उसका मुख्यालय केलांग बनाया गया। पंजाब सरकार ने लाहौल स्पीति को 1960 में जिला बनाया। वर्ष 1966 ई. में लाहौल स्पीति का विलय हिमाचल प्रदेश में हो गया।

(iv) कला, संस्कृति, मेंले और गोम्पा

1. गोम्पा-खारंदोग, शांशुर, गेमूर और गुरुघंटाल गोम्पा लाहौल में और, ताबो, की और धाकर गोम्पा स्पीति में स्थित है। ताबो, की और धांकर गोम्पा स्पीति नदी के किनारे स्थित है। गेमूर गोम्पा भागा नदी के किनारे स्थित है। ‘की’ हिमाचल प्रदेश का सबसे ऊँचा व बड़ा गोम्पा है। ताबो गोम्पा विश्व का प्राचीनतम गोम्पा है।

2. धर्म-लाहौल में हिन्दू और बौद्ध धर्म दोनों को मानने वाले लोग हैं। गेफांग, डाबला और तंग्यूर यहाँ के प्रमुख देवता हैं। स्पीति में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग हैं।

3. विवाह-लाहौल में तभाग्स्टन/मोवी बियाह व्यवस्थित/तय विवाह है। कुनमाई भाग स्टन/कौन्ची विवाह भाग कर किया गया विवाह है।

4. त्योहार/उत्सव

लदारचा-यह मेला हर वर्ष जुलाई में किब्बर गाँव में लगता है।

सिस्सु मेला-यह मेला जून में शांशुर गोम्पा, जुलाई में गेमूर गोम्पा और अगस्त में गोंदला के मनी गोम्पा में लगता है।

फागली मेला-फागली या कुन मेला फरवरी की अमावस्या को पट्टन घाटी में लगता है। यह फाल्गुन के आने का संकेत देता है।

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