November 30, 2022

History of Kinnaur District in Hindi- किन्नौर जिला का इतिहास

History of Kinnaur District in Hindi

history of solan district

जिले के रूप में गठन – 21 अप्रैल, 1960        जिला मुख्यालय – रिकांगपियो

जनसंख्या घनत्व – 13 (2011 में)       साक्षरता – 80.77%(2011 में)

कुल क्षेत्रफल – 6401 वर्ग किलोमीटर (11.50% हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल का)

जनसंख्या – 84,248(2011 में) (1.23% हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या का)

लिंग अनुपात – 818 (2011 में) (न्यूनतम)

दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर – 7.61% (2001-2011)

कुल गाँव –  660 (आबाद गाँव- 234)    ग्राम पंचायत – 65

विकास खंड – 3

किताबे

किन्नर देश – राहुल सांकृत्यायन

किन्नर इन द हिमालय – एस.सी वाजपेयी

किन्नर लोक साहित्य – बंशीराम शर्मा

द म्यूजिक ऑफ़ किन्नौर – ई.ए.चौहान

1.भौगोलिक स्थिति

किन्नौर हिमाचल प्रदेश के पूर्व में स्थित एक जिला है|यह 31°55’50” से 32°05’15” उतरी अंक्षास 77°45′ से 79°04’35” पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है| किन्नौर के पूर्व में तिब्बत दक्षिण में उत्तराखंड पश्चिम में कुल्लू दक्षिण और पश्चिम में शिमला तथा उत्तर पश्चिम में लाहौल स्पीति जिला स्थित है जाकर किन और और तिब्बत के बीच सीमा निर्धारण करता है किन्नौर और तिब्बत की सीमा पर हेतु से होकर शिपकिला, रैंसों, शिम्डोंग,और सुमरंग दर्रे से होकर गुजरती है| 

2.घाटियाँ 

सतलुज घाटी की किन्नौर की सबसे बड़ी घाटी है| हांगरांग घाटी स्पीती नदी के साथ स्थित है जो खाब गांव के पास सतलुज में मिलती है| सुनाम या रोपाघाटी रोपा नदी द्वारा बनती है| बसपा घाटी को सांगला घाटी के नाम से भी जाना जाता है| यह घाटी बसपा नदी द्वारा निर्मित होती है| यह किन्नौर की सबसे सुंदर घाटी है| कामरु गांव सांगला घाटी में स्थित है| घाटी डोंगरी द्वारा निर्मित होती है भाभा किन्नौर का सबसे बड़ा गांव है जो भाभा घाटी में स्थित है| 

3, नदियाँ-सतलुज नदी किन्नौर को दो बराबर भागों में बाँटती है। सतलुज को तिब्बत में जुगंति और मुकसुंग के नाम से जाना जाता है। रोपा नदी शियाशु के पास सतलुज नदी में मिलती है। कसांग, तैती, यूला, मुलगुन, स्पीति और बस्पा सतलुज की किन्नौर में प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

4. शीलें नाको (हांगरांग तहसील में स्थित) और सोरंग (निचार तहसील में स्थित) किन्नौर की प्रमुख झीलें हैं।

5. वननियोजा वृक्ष पूरे देश में केवल किन्नौर में पाया जाता है।

(ii) इतिहास

  1. प्राचीन इतिहास-वर्तमान किन्नौर प्राचीन रियासत बुशहर का हिस्सा रहा है। किन्नौर की आदिम जाति की उत्पत्ति दैविक लीला से हुई मानी जाती है। अमरकोश ग्रंथ में किन्नर जाति का वर्णन मिलता है। हिन्दूधर्म ग्रंथ में किन्नर लोगों को अश्वमुखी और किम् + नरः (किस प्रकार का नर) कहा गया है। तिब्बती लोग किन्नौर को खुनू कहते हैं। लद्दाख में किन्नौर, बुशहर और कामरू को मोने कहा जाता है। किन्नौर के निवासी प्राचीन काल में खस थे। किन्नौर राजपूत जो खसों की उपजातियाँ थीं। कनैत और में विभाजित हो गई थी। पाण्डवों ने 12 वर्षों का वनवास किन्नौर में बिताया था । कालिदास ने अपनी पुस्तक कुमारसंभव में किन्नरों का वर्णन किया है। वायु पुराण में किन्नरों को महानंद पर्वत का निवासी बताया गया है। रियासत की स्थापना-बनारस के चंद्रवंशी राजा प्रद्युम्न ने कामरू में राजधानी स्थापित कर बुशहर रियासत की नींव रखी बौद्ध धर्म का आगमन-सातवीं से दसवीं सदी के बीच तिब्बत के गूगे साम्राज्य के प्रभाव में आकर किन्नौर में बौद्ध धर्म और भोटिया भाषा का प्रभाव पड़ा था।

2. मध्यकालीन इतिहास- बुशहर रियासत बिलासपुर और सिरमौर के साथ शिमला पहाड़ी राज्यों की तीन प्रमुख शक्तियों में से एक थी। राजा चतर सिंह बुशहर रियासत का 110वाँ शासक था । चतर सिंह ने अपनी राजधानी कामरू से सराहन स्थानांतरित की थी। राजा चतर सिंह का पुत्र केहरी सिंह रियासत का सबसे प्रभावी शासक था जिसे ‘अजानबाहु’ भी कहा जाता था, उसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने ‘छत्रपति’ की उपाधि दी तिब्बत-लद्दाखी मुगल युद्ध में राजा केहरी सिंह ने तिब्बतियों का साथ दिया जिस कारण तिब्बतद्वारा हंगरंग घाटी बुशहर को भेंट में दी गई और तिब्बत और बुशहर राज्य के बीच मुक्त व्यापार प्रारम्भ हुआ। चतर सिंह के प्रपौत्र कल्याण सिंह ने कल्याणपुर शहर को अपनी राजधानी बनाया।

3. आधुनिक इतिहास गोरखा आक्रमण– केहरी सिंह की मृत्यु के बाद उसका नाबालिग पुत्र महेन्द्र सिंह गद्दी पर बैठा। गोरखों ने 1803 से 1815 तक बुशहर रियासत पर आक्रमण कर सराहन पर कब्जा कर लिया । राजा महेन्द्र सिंह ने कामरू में अपना डेरा जमाया। वजीर टिक्का राम और बदरी प्रसाद ने गोरखों के विरुद्ध युद्ध का नेतृत्व किया। सतलुज नदी पर बने वांगतू पुल को तोड़कर गोरखों के आक्रमण रामपुर-बुशहर रियासत के राजा राम सिंह (1767-99 ई.) ने सराहन से राजधानी रामपुर बदली और रामपुर शहर की नींव रखी। 1857 ई. का विद्रोह-बुशहर रियासत के राजा शमशेर सिंह ने 1857 ई. के विद्रोह में अंग्रेजों की सहायता नहीं की जिसको शिकायत शिमला के DC विलियम हे ने की।

राजा शमशेर सिंह– राजा शमशेर सिंह के वजीर मुंशीलाल के 1854 ई. में राजस्व कर के विरोध में बुशहर रियासत में 1882 ई. में विद्रोह हुआ। राजा शमशेर सिंह को 1887 ई. में उसके पुत्र टिक्का रघुनाथ सिंह के पक्ष में गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। टिक्का रघुनाथ सिंह ने 1895 ई. में चीनी तहसील की नींव रखी।

राजा पदम सिंह-राजा पदम सिंह को 1914 ई. में अंग्रेजों ने रामपुर बुशहर का राजा माना। राजा पदम सिंह रामपुर बुशहर के अंतिम राजा हुए। वह आजादी तक रामपुर बुशहर के राजा बने रहे। मास्टर अन्नूलाल, सत्यदेव बुशहरी जैसे आंदोलनकारी के प्रयासों से राजा पद्म सिहं ने रामपुर बुशहर का भारत में विलय स्वीकार किया| 1948 ई. में बुशहर रियासत का हिमाचल प्रदेश में विलय हो गयाहै| वीरभद्र सिहं (6 बार मुख्यमंत्री) पद्म सिहं के पुत्र है जो बुशहर रियासत की 131वीं पीढ़ी से सबंधित हैं। वर्तमान किन्नौर जिला 1960 से पहले महासू जिले की चीनी तहसील के रूप में जाना जाता था| 21 अप्रैल 1960 को चीनी तहसील महासू जिले से अलग होकर किन्नौर नाम से हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बना।

(ii) संस्कृति, त्योहार, रीति-रिवाजकिन्नौर में मृत्यु के उपरांत शवों की डुबंत, फुकंत और भखंत की प्रथा प्रचलित है।

  1. विवाह– किन्नौर में जनेटांग व्यवस्थित विवाह है। दमचल शीश, दमटम शोश, जुजीश प्रेम विवाह है। दरोश, डबडब, हचीश।नेमशा डेपांग जवरन विवाह के प्रकार हैं। ‘हर’ दूसरे की पत्नी को भगाकर किया गया विवाह है।
  2. त्यौहार छतरैल त्यौहार –  यह त्यौहार चारगांव में चैत्र माह में मनाया जाता है| यह त्यौहार अपनी अश्लीलता के लिए प्रसिद्ध है|

द्खेरनी त्यौहार सावण के महीने में मनाया जाता है|

उखयांग या फुलैच त्यौहार यह फूलों का त्यौहार है जो किन्नौर में सबसे प्रशिद्ध है| यह अगस्त से अक्टूबर के बिच मनाया जाता है| उसके अलावा फगुली,लोसर,जागरो,साजो,खेपा,छांगों शेशुल और इराटांग किन्नौर के प्रसिद्ध त्यौहार है|

तोशिम त्यौहार – यह त्यौहार अविवाहित पुरुषों द्वारा मनाया जाता है| इसमें स्थानीय शराब घांति का सेवन किया जाता है|

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