January 31, 2023

चम्बा का इतिहास-History of Chamba In Hindi-Chamba Gk in Hindi

Brief History of District Chamba

14. बलभद्र (1589 ई.) एवं जनार्दन-बलभद्र बहुत दयालु और दानवीर था। लोग उसे ‘बाली-कर्ण’ कहते थे। उसका पुत्र जनार्दन उन्हें गद्दी से हटाकर स्वयं गद्दी पर बैठा । जनार्धन के समय नूरपुर का राजा सूरजमल मुगलों से बचकर उसकी रियासत में छुपा था। सूरजमल के भाई जगत सिंह को मुगलों द्वारा काँगड़ा किले का रक्षक बनाया गया जो सूरजमल के बाद नूरपूर का राजा बना। जहाँगीर के 1622 ई. में काँगड़ा भ्रमण के दौरान चम्बा का राजा जनार्दन और उसका भाई जहांगीर से मिलने गए। चम्बा के राजा जन धन और जगतसिंह के बीच धलोग में युद्ध हुआ जिसमें चम्बा की सेना की हार हुई। भिस्मबर, जनार्दन का भाई युद्ध में मारा गया। जनार्दन को भी 1623 ई. में जगत सिंह ने धोखे से मरवा दिया। बलभद्र को चम्बा का पुनः राजा बनाया गया। परन्तु चम्बा 20 वर्षों तक जगतसिंह के कब्जे में रहा। जगत सिंह ने बलभद्र के पुत्र होने की स्थिति में उसकी हत्या करने का आदेश दिया था। बलभद्र को पृथ्वी सिंह नाम का पुत्र हुआ जिसको नर्स (दाई) बाटलू बचाकर मण्डी राजघराने तक पहुंच गई।

15. पृथ्वी सिंह (1641 ई.)-जगत सिंह ने शाहजहां के विरुद्ध 1641 ई. में विद्रोह कर दिया। इस मौके का फायदा उठाते हुए पृथ्वी सिंह ने मण्डी और सुकेत की मदद से रोहतांग दर्रे, पांगी, चुराह को पार कर चम्बा पहुँचा। गुलेर के राजा मानसिंह जो जगत सिंह का शत्रु था उसने भी पृथ्वी सिंह की मदद की। पृथ्वी सिंह ने बसौली के राजा संग्राम पाल को भलेई तहसील देकर उससे गठबंधन किया। पृथ्वी सिंह ने अपना राज्य पाने के बाद चुराह और पांगी में राज अधिकारियों के लिए कोठी बनाई। पृथ्वी सिंह और संग्राम पाल के बीच भलेई तहसील को लेकर विवाद हुआ जिसे मुगलों ने सुलझाया। भलेई को 1648 ई. में चम्बा को दे दिया गया। पृथ्वी सिंह मुगल बादशाह शाहजहाँ का समकालीन था। उसने शाहजहाँ के शासनकाल में 9 बार दिल्ली की यात्रा की और ‘रघुवीर’ की प्रतिमा शाहजहां द्वारा भेट में प्राप्त की। चम्बा में खज्जीनाग (खजियार), हिडिम्बा मंदिर (मैहला) और सीताराम मंदिर (चम्बा) का निर्माण पृथ्वी सिंह की नर्स (दाई) बाटलू ने करवाया जिसने पृथ्वी सिंह के प्राणों की रक्षा की थी।

16. चतर सिंह (1664 ई.)-चतर सिंह ने बसौली पर आक्रमण कर भलेई पर कब्जा किया था। चतर सिंह औरंगजेब का समकालीन था। उसने 1678 ई. में औरंगजेब का सभी हिन्दू मंदिरों को नष्ट करने का आदेश मानने से इनकार कर दिया था।

17. उदय सिंह (1690 ई.)-चतर सिंह के पुत्र राजा उदय सिंह ने अपने चाचा वजीर जय सिंह की मृत्यु के बाद एक नाई को उसकी पुत्री के प्रेम में पड़कर चम्बा का वजीर नियुक्त कर दिया। (रुमाल कला)

18. उम्मेद सिंह (1748)-उम्मेद सिंह के शासन काल में चम्बा राज्य मण्डी की सीमा तक फैल गया। उम्मेद सिंह का पुत्र राज सिंह राजनगर में पैदा हुआ। उम्मेद सिंह ने राजनगर में ‘नाडा महल’ बनवाया। रंगमहल (चम्बा) की नींव भी उम्मेद सिंह ने रखी थी। उसने अपनी मृत्यु के बाद रानी के सती न होने का आदेश छोड़ रखा था। उम्मेद सिंह की 1764 ई. में मृत्यु हो गई थी।।

19. राज सिंह (1764 ई.)-राज सिंह अपने पिता की मृत्यु के बाद 9 वर्ष की आयु में राजा बना। घमण्ड चंद ने पथियार को चम्बा से छीन लिया। परन्तु रानी ने जम्मू के रणजीत सिंह की मदद से इसे पुनः प्राप्त कर लिया। चम्बा के राजा राज सिंह और कांगड़ा के राजा संसार चंद के बीच रिहलू क्षेत्र पर कब्जे के लिए युद्ध हुआ। राजा राज सिंह की शाहपुर के पास 1794 ई. में युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई। निक्का, रांझा, छज्जू और हरकू राजसिंह के दरबार के निपुण कलाकार थे।

20. जीत सिंह (1794 ई.)-जीत सिंह के समय चम्बा राज्य ने नाथू वजीर को संसारचंद के खिलाफ युद्ध में सैनिकों के साथ भेजा। नाथू वजीर गोरखा अमर सिंह थापा, बिलासपुर के महानचंद आदि के अधीन युद्ध लड़ने गया था।

21. चरहट सिंह (1808 ई.)-चरहट सिंह 6 वर्ष की आय में राजा बना। नाथू वजीर राजकाज देखता था। रानी शारदा (चरहट सिंह की माँ) ने 1825 ई. में राधा कृष्ण मंदिर की स्थापना की। पद्दर के राज अधिकारी रतनू ने 1820-25 ई. में जास्कर पर आक्रमण कर उसे चम्बा का भाग बनाया था। 1838 ई. में नाथू वजीर की मृत्यु के बाद ‘वजीर भागा’ चम्बा का वजीर नियुक्त किया गया। 1839 ई. में विग्ने और जनरल कनिंघम ने चम्बा की यात्रा की। चरहट सिंह की 42 वर्ष की आयु में 1844 ई. में मृत्यु हो गई।

22. श्री सिंह (1844 ई.)-श्री सिंह 5 वर्ष की आयु में गद्दी पर बैठा लक्कड़ शाह ब्राह्मण श्री सिंह के समय प्रशासन पर  नियंत्रण रखे हुए था जिसकी बैलज में हत्या कर दी गई। अंग्रेजों ने 1846 ई. को जम्मू के राजा गुलाब सिंह को चम्बा दे दिया। परन वजीर भागा के प्रयासों से सर हेनरी लॉरेंस ने चम्बा की वर्तमान स्थिति रहने दी। भद्रवाह को हमेशा के लिए चम्बा से लेकर जम्मू को दे दिया गया। श्री सिंह के समय चम्बा 1846 ई. में अंग्रेजों के अधीन आ गया। श्री सिंह को 6 अप्रैल, 1848 को सनद प्रदान की गई श्री सिंह 1857 ई. के विद्रोह के समय अंग्रेजों के प्रति समर्पित रहा। उसने मियां अवतार सिंह के अधीन डलहौजी में अपनी की सहायता के लिए सेना भेजी। वजीर भागा 1854 ई. में सेवानिवृत्त हो गया और उसका स्थान वजीर बिल्लू ने ले लिया। मेला ब्लेयर रीड 1863 ई. में चम्बा के सुपरिन्टेन्डेन्ट बने। 1863 ई. में डाकघर खोला गया। चम्बा के वनों को अंग्रेजों को 99 वर्ष की लीज पर दे दिया गया। श्री सिंह की 1870 ई. में मृत्यु हो गई।

23. गोपाल सिंह (1870 ई.)-श्री सिंह का भाई गोपाल सिंह गद्दी पर बैठा। उसने शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए कई काम किए। उसके कार्यकाल में 1871 ई. में लार्ड मायो चम्बा आए। गोपाल सिंह को गद्दी से हटा 1873 ई. में उसके बड़े बेटे शाम सिंह को राजा बनाया गया।

24. शाम सिंह (1873 ई.)-शाम सिंह को 7 वर्ष की आयु में जनरल रेनल टेलर द्वारा राजा बनाया गया और मियां अवतार सिंह को वजीर बनाया गया। सर हेनरी डेविस ने 1874 ई. में चम्बा की यात्रा की शाम सिंह ने 1875 ई. और 1877 ई. के दिल्ली दरबार में भाग लिया। वर्ष 1878 ई. में जान हैरी को शाम सिंह का शिक्षक नियुक्त किया गया। चम्बा के महल में दरबार हॉल को C.H.T. मार्शल के नाम पर जोड़ा गया। वर्ष 1880 ई. में चम्बा में हाप्स की खेती शुरू हुई। सर चार्ल्स एटिक्सन ने 1883 ई. में चम्बा की यात्रा की। 1875 ई. में कर्नल रीड के अस्पताल को तोड़कर 1891 ई. में 40 बिस्तरों का शाम सिंह अस्पताल बनाया गया। रावी नदी पर शीतला पुल जो 1894 ई. की बाढ़ में टूट गया था की जगह लोहे का सस्पेंशन पुल बनाया गया। 1895 ई. में भटियात में विद्रोह हुआ। शाम सिंह के छोटे भाई मियां भूरी सिंह को 1898 ई. में वजीर बनाया गया। वर्ष 1900 ई. में लार्ड कर्जन और उनकी पत्नी चम्बा की यात्रा पर आए। 1902 ई. में शाम सिंह बीमार पड़ गए। वर्ष 1904 ई. में भूरी सिंह को चम्बा का राजा बनाया गया।

25. राजा भूरी सिंह (1904 ई.)-राजा भूरी सिंह को 1 जनवरी, 1906 ई. को नाईटहुड की उपाधि प्रदान की गई। भूरी सिंह संग्रहालय की स्थापना 1908 ई. में की गई | राजा भूरी सिंह ने प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) में अंग्रेजों की सहायता की साल नदी पर 1910 ई. में एक बिजलीघर का निर्माण किया गया जिससे चम्बा शहर को बिजली प्रदान की गई। राजा भूरी सिंह की 1919 ई. में मृत्यु हो गई। राजा भूरी सिंह की मृत्यु के बाद टिक्काराम सिंह (1919-1935) चम्बा का राजा बना।

26. राजा लक्ष्मण सिंह-राजा लक्ष्मण सिंह को 1935 ई. में चम्बा का अंतिम राजा बनाया गया। चम्बा रियासत 15 अप्रैत, 1948 ई. को हिमाचल प्रदेश का हिस्सा बन गई।

(iii) मेले, मंदिर, कला एवं संस्कृतिमंदिर व मेले-भरमौर में 84 मंदिरों का समूह है।

मिंजर मेला-मिंजर मेला साहिल वर्मन द्वारा शुरू किया गया। मिंजर का अर्थ है-मक्की का सिट्टा जिसे रावी नदी में बहाया जाता है। इसमें चम्बा के लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा की जाती है। इस मेले को राजा प्रताप वर्मन द्वारा काँगड़ा शासक पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। यह मेला अगस्त के महीने में चंबा के चौगान मैदान पर लगता है। 

सूही मेला-यह मेला साहिल वर्मन द्वारा शुरू किया गया था। यह मेला अप्रैल के महीने में लगता है। यह महिलाओं और बच्चों के लिए भी मनाया जाता है। साहिल वर्मन की पत्नी रानी नयना देवी की राज्य में पानी की आपूर्ति के लिए बलिदान देने पर यह मेला प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

यात्रा-फूल यात्रा पांगी के किलाड में अक्टूबर के महीने में होती है। छतराड़ी यात्रा सितंबर के महीने तथा भरमौर यात्रा अगस्त के महीने में होती है। मणिमहेश यात्रा अगस्त-सितम्बर के महीने में होती है। नवाला मेला गद्दी जनजाति द्वारा मनाया जाता है, जिसमें शिव की पूजा की जाती है। कला-चम्बा की रूमाल कला सबसे अधिक प्रसिद्ध है। चम्बा शैली की चित्रकला का उदय राजा उदय सिंह के समय में हुआ। गुलेर से चम्बा आए निक्कू, छज्जू और हरकू इस शैली के मुख्य कलाकार थी।चम्बा करगमहल, चंडी, लक्ष्मी नारायण मंदिर इसी शैली में बने है| 

लोकनृत्य – झांझर और नाटी 

गीत – कुंजू चंचलो, रंझू फुल्मु, भुक्कु गद्दी| 

नवोदय स्कुल – सरोल में 

केन्द्रीय विद्यालय – सुरंगानी और करिया में 

भाषा – चम्ब्याली. भटयाती, चुराही, पंगवाली, भरमौरी| 

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