February 2, 2023

Modern History of Bihar for Bpsc-History of Bihar In Hindi

बिहार का इतिहास : मध्य काल

बिदुसार (297 ई.पु. से 273 ई.पु.) – बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र व उत्तराधिकारी था जिसे वायु पुराण में मद्रसार और जैन साहित्य में सिंह सेन कहा गया है| यूनानी लेकर के नए-नए अभीलोचेटेसग कहा है| यह 297 ईसा पूर्व मगध साम्राज्य के सियाचिन पर बैठा जैन ग्रंथों के अनुसार बिंदुसार की माता दुर्धरा थी| थेरवाद परंपरा के अनुसार वह ब्राह्मण धर्म का अनुयाई था| 

अशोक (273 ई.पु. से 236 ई. पु.)- राजगद्दी प्राप्त होने के बाद अशोक को अपनी आंतरिक स्थिति सुदृढ़ करने पर 4 वर्ष लगे| इस कारण राज्यरोहण 4 साल बाद 269 साल पूर्व में हुआ था|

-अशोक ने अपने राज्य विशेष के सातवें वर्ष 269 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया था| आंतरिक अशांति से निपटाने के बाद 269 ईसा पूर्व में विधिव अभिषेक हुआ|13वें शिलालेख के अनुसार कलिंग युद्ध में 1 लाख 50 हजार व्यक्ति बंदी बनाकर निर्वासित कर दिए गए| 1लाख लोगों की हत्या कर दी गई थी| सम्राट अशोक ने भारी नरसंहार को अपनी आंखों से देखा|  इससे प्रभावित होकर अशोक ने शांति, सामाजिक प्रगति तथा धार्मिक प्रचार किया| 

-कलिंग युद्ध ने अशोक के ह्रदय के महान परिवर्तन कर दिया| उसका ह्रदय मानवता के प्रति दया और करुणा से उद्वेलित हो गया| उसने उन क्रियाओं को सदा के लिए बंद करने की प्रतिज्ञा की| यहां से आध्यात्मिक व धम्म विषय का युग शुरू हुआ| उसने बौद्ध धर्म को अपना धर्म को स्वीकार किया|

अशोक एवं बौद्ध धर्म – कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने व्यक्तिगत रूप से बौद्ध धर्म को अपना लिया|

– अशोक के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया| जिसकी अध्यक्षता मुगाली पुत्र तिष्या ने की| इसी में अभीधम्मपीटक की रचना हुई और बौद्ध भिक्षु विभिन्न देशों में भेजे गए, जिनमें अशोक के पुत्र महेंद्र एवं पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा गया|

-अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया और राज्य के सभी साधनों को जनता के कारण हेतु लगा दिया|

– अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए निम्नलिखित साधन अपनाएं-

धर्म यात्राओं का आरंभ, राजकीय पदाधिकारियों की नियुक्ति, धर्म महापात्रों की नियुक्ति,  दिव्य रूपों का प्रदर्शन, धर्म श्रावण एवं धर्मउपदेश की व्यवस्था, लोकाचारीता के कार्य, धर्म लिपियों का खुदवाना, विदेशों में धर्म प्रचार के प्रचारक को भेजना आदि|

अशोक के 14 शिलालेख विभिन्न लेखों का समूह है जो 8 दिन बिन स्थानों से प्राप्त किए गए हैं-

1.धौली – यह ओड़िसा के पूरी जिले में है

2.शाहबाज गढ़ी- यह पाकिस्तान (पेशावर) में है| 

3.मान सेहरा – यह हजारा जिले में स्थित है| 

4.कालपी- यह वर्तमान में उतराखंड (देहरादून) में है| 

5.जौगढ़ – यह ओड़िसा के जौगढ़ में है| 

6.सोपरा-यह महाराष्ट्र के थाणे जिले में है| 

7.एरागुडी- यह आंध्र प्रदेश के कुंर्नुल जिले में स्थित है| 

8.गिरनार- यह काठीयाबाड़ में जुनागढ़ के पास है| 

अशोक के लघु शिलालेख चौदह शिलालेखों के मुख्य वर्ग में सम्मिलित नहीं है| जिसे लघु शिलालेख कहा जाता है| ये निम्नाकिंत स्थानों से प्राप्त हुए है-

1.रूपनाथ – यह्म्ध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में है| 

2.गुजरी- यह मध्य प्रदेश के द्तुया जिले में है| 

3.भबु – यह राज्यस्थान के जयपुर जिले के विराटनगर (बैराठ) में है| 

4.मास्की- यह रायचूर जिले में स्थित है| 

5.सहसराम – यह बिहार के शाहाबाद जिले में है| 

-धम्म को लोकप्रिय बनाने के लिए अशोक ने मानव व पशु जाति के कल्याण हेतु पशु पक्षियों की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था राज्य तथा विदेशी राज्यों में भी मानव तथा पशु के लिए अलग चिकित्सा की व्यवस्था की अशोक के महान पुण्य का कार्य एवं स्वर्ग प्राप्ति का उपदेश बौद्ध ग्रंथ संयुक्ता निकाय में दिया गया है| 

– अशोक ने दूर-दूर तक बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु दूतों प्रचारकों को विदेशों में भेजा और दूसरे तथा 13 वें शिलालेख में उसने उन देशों का नाम लिखवाया जहां दूत भेजे गए थे|

– अभी तक अशोक के 40 अभिलेख प्राप्त हो चुके हैं सर्वप्रथम 1737 ई.पू पूर्व में जेम्स प्रिसेप नामक विद्वान ने अशोक के अभिलेखों को पढने में सफलता हासिल की थी| 

रायपुरबा – यह भी बिहार राज्य के चम्पारण जिले में है| 

प्रयाग- यह पहले कौशाम्बी में स्थित था जो बाद में मुगल सम्राट अकबर द्वारा इलाहबाद के किले में रखवाया गया था| 

शुंग राजवंश

पुष्यमित्र शुंग – मौर्य सम्राज्य के अंतिम शासक वृहद्र्थ की हत्या करके 174 ई.पु. में पुष्यमित्र सम्राज्य के राज्य पर अधिकार कर लिया| जिस नये राजवंश की स्थापना की उसे पुरे देश में शुंग राजवंश के नाम से जाना जाता है| शुंग ब्राह्मण थे| बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के फलस्वरूप आशोक द्वारा यज्ञों पर रोक लगा दिए जाने के बाद उन्होंने पुरोहित का कर्म त्यागकर सैनिक वृति को अपना लिया था| पुष्यमित्र अंतिम मौर्य शासक वृहद्रथ का प्रधान सेनापति था| 

-पुष्यमित्र शुंग के पश्चात इस वंश में नौ शासक और हुए जिनके नाम थे- अग्निमित्र, वसुज्येष्ठ, वसुमित्र, भद्रक, तीन अज्ञात शासक, भागवत और देवभूति| 

-शुंग राजाओं का काल वैदिक अथवा ब्राह्मण धर्म का पुनर्जागरण काल माना जाता है| 

-मानव आकृतियों के अंकन में कुशलता दिखाई गई है| एक चित्र में गरुड सूर्य तथा दुसरे में श्री लक्ष्मी का अंकन अत्यंत कलापूर्ण है| 

-पुष्यमित्र शुंग ने ब्राह्मण धर्म का पुनर्त्थान किया| शुंग के सर्वोतम स्मारक स्तूप है| 

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